US-ईरान की समयसीमा किसी भी पल के लिए तैयार है: ट्रंप क्या करेंगे?
एक चौंकाने वाले कदम में, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को दरकिनार करते हुए कहा है कि वह समयसीमा का पालन नहीं करेंगे या दबाव में काम नहीं करेंगे। अब बस 24 घंटे की समयसीमा शेष रह गयी है, जिसके बाद ट्रंप की समयसीमा समाप्त होने जा रही है, और अनिश्चितता का माहौल बन गया है, जिससे दुनिया की निगाहें इस स्थिति पर टिकी हुई हैं कि आगे क्या होगा।
TL;DR:
- ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की समयसीमा का पालन नहीं किया है और दबाव में काम करने के लिए तैयार नहीं है।
- अब बस 3 दिन शेष रह गए हैं, और अनिश्चितता का माहौल बन गया है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुपचाप इंतज़ार कर रहा है।
- US अधिकारी अपने अगले कदम का विचार कर रहे हैं क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है।
क्या हुआ
ट्रंप ने ईरान के विदेश मंत्रालय के द्वारा घोषित किए गए कोयले के उत्पादन की सीमा को पार करने के लिए 24 घंटों की समयसीमा निर्धारित की थी। 2015 के परमाणु समझौते के रूप में जाने वाले जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जीसीपीए) के तहत ईरान के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि वह कोयले के उत्पादन की सीमा को पार करने के लिए तैयार है। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बारे में ईरान ने कहा है कि यह “अनुचित और अन्यायपूर्ण” है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि देश समयसीमा का पालन नहीं करेगा या दबाव में काम नहीं करेगा, और यह कहा कि वह अमेरिकी धमकियों से डर नहीं मानेगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
इस स्थिति के परिणामस्वरूप वैश्विक सुरक्षा और मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परिणाम हो सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का टूटना बड़े स्तर के संघर्ष की ओर जा सकता है, जिससे तेल की कीमतें, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती हैं। ब्रुकिंग्स संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने 2018 से ईरान पर 500 से अधिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिसका उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को कम करना और उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है।
मुख्य प्रतिक्रियाएँ/व्याख्यान
US कोषागार विभाग ने कहा है कि वे ईरान की समयसीमा का उल्लंघन करने के लिए और प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने एक बयान में कहा है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान को उसकी व्यवहार में बदलाव करने के लिए अधिकतम दबाव डालने के लिए काम करेगा। ईरान के विदेश मंत्री, मोहम्मद जावाद जरीफ ने अमेरिकी धमकियों का जवाब देते हुए कहा है कि ईरान दबाव में नहीं आएगा और परमाणु कार्यक्रम के लिए आगे बढ़ेगा।
अगला कदम
आगामी समयसीमा के करीब आते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय संभावित रूप से दोनों देशों के बीच तनाव के पुनरुत्थान के लिए तैयार है। UN सुरक्षा परिषद द्वारा इस स्थिति की निगरानी की जा रही है, जिसने शांति और तनाव कम करने की अपील की है। UN महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने एक बयान में कहा है कि स्थिति “बहुत ही भड़काऊ” है और UN इस स्थिति को व्याप्त करने के लिए काम कर रहा है। यह स्थिति यूरोपीय संघ द्वारा भी देखी जा रही है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता और संवाद के लिए एक वापसी की अपेक्षा की है।
