₹500 करोड़ की विरासत: दिल्ली का 90 एकड़ का आशियाना 90 वर्षों में एक आधुनिक शहरी खजाना बन गया है

दिल्ली के 90 एकड़ के ओखला पक्षी अभयारण्य को जल्द ही एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाने का अवसर मिलेगा – 90 वर्षों का अस्तित्व। यह अद्भुत शहरी हरित क्षेत्र, जिसे 1937 में एक शिकार केन्द्र के रूप में स्थापित किया गया था, अब एक विकसित प्रणाली बन गया है जो 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का समर्थन करता है, जिससे यह माइग्रेटिंग पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण रुकने का स्थल बन गया है।

TL;DR:

  • ₹500 करोड़ की विरासत: ओखला पक्षी अभयारण्य का अनुमानित मूल्य इसके महत्व को एक महत्वपूर्ण शहरी हरित क्षेत्र के रूप में प्रमाणित करता है।
  • 90 वर्षों का अस्तित्व: अभयारण्य ने अपने शुरुआती दिनों के रूप में एक शिकार केन्द्र के रूप में एक लंबी दूरी तक आए हैं।
  • 300+ पक्षी प्रजातियां: अभयारण्य माइग्रेटिंग पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण रुकने का स्थल है, जो 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का समर्थन करता है।

क्या हुआ

ओखला पक्षी अभयारण्य को मूल रूप से 1937 में भारत के वायसराय, लॉर्ड लिंलिथगो द्वारा एक शिकार केन्द्र के रूप में स्थापित किया गया था। हालांकि, 1969 में, इसे लोगों के लिए खोल दिया गया, जिससे इसके उद्देश्य में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। वर्षों बीतने के बाद, अभयारण्य को कई परिवर्तनों का सामना करना पड़ा, जिसमें 1975 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा इसके प्रबंधन को संभालना शामिल था। आज, अभयारण्य शहर के दिल में एक 90 एकड़ का आशियाना बन गया है, जो कई जानवरों के लिए आवास प्रदान करता है, जिनमें सरीसृप, अम्बियोडाक्टाइल और मांसाहारी शामिल हैं।

अभयारण्य की विविध भौगोलिक स्थिति, जिसमें जलाशय, जंगल और घास के मैदान शामिल हैं, इसकी सफलता की कुंजी है। जलाशय, विशेष रूप से, जलीय जीवन की एक विस्तृत श्रृंखला का समर्थन करते हैं, जिसमें मछली, टर्टल और क्रोकोडाइल शामिल हैं। जंगल, दूसरी ओर, जानवरों के लिए आवास प्रदान करते हैं, जैसे कि हिरण, बंदर और पक्षी। घास के मैदान, जो अभयारण्य के एक महत्वपूर्ण हिस्से को कवर करते हैं, विभिन्न प्रकार की घास का समर्थन करते हैं और कई पक्षी प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रजनन क्षेत्र हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

ओखला पक्षी अभयारण्य एक महत्वपूर्ण शहरी हरित क्षेत्र है जो दिल्ली के पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों के साथ, यह माइग्रेटिंग पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण रुकने का स्थल है, जो वे हर साल प्रवास करते हैं। अभयारण्य की विविध भौगोलिक स्थिति भी अन्य जानवरों के लिए आवास प्रदान करती है, जैसे कि सरीसृप, अम्बियोडाक्टाइल और मांसाहारी। अभयारण्य एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है, जो प्रति वर्ष हजारों दर्शकों को आकर्षित करता है।

अभयारण्य का महत्व इसके पारिस्थितिकी तंत्रिक महत्व से परे है। यह शहरी संरक्षण और विविधता संरक्षण का एक मॉडल भी है। डीडीए के द्वारा अभयारण्य का प्रबंधन किया जाता है, जो शहरी संरक्षण के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट प्रथा का उदाहरण है, जिसमें अभयारण्य अन्य शहरों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करता है। अभयारण्य की विरासत का अनुमान ₹500 करोड़ है, जो इसके महत्व को एक महत्वपूर्ण शहरी हरित क्षेत्र के रूप में प्रमाणित करता है।

मुख्य प्रतिक्रियाएं/वाक्यांश

“हम ओखला पक्षी अभयारण्य के वर्षों में हासिल की गई उपलब्धियों पर गर्व करते हैं,” डीडीए के एक प्रवक्ता ने कहा। “यह एक शहरी संरक्षण और विविधता संरक्षण का एक शानदार उदाहरण है। हम आगे के प्रयासों को जारी रखने के लिए उत्साहित हैं ताकि हम इस महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को बचाएं और संरक्षित करें।”

“ओखला पक्षी अभयारण्य एक महत्वपूर्ण शहरी हरित क्षेत्र है जो दिल्ली के पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

By AI News Editorial

AI-powered news desk covering business, geopolitics and economy in English, Hindi and Telugu.

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